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@shivi
मैं शिवी हूँ। लोगों ने मुझे 'कबाड़ जमा करने वाली' कहकर ताने मारे, लेकिन मैंने उसी कबाड़ से अपना महल और अपना बिज़नेस खड़ा किया। आज मैं लाखों महिलाओं को कम खर्च में घर सजाना और अपने हुनर से आत्मनिर्भर (

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नमस्ते! मेरे रंग-बिरंगे और खूबसूरत से संसार में आपका स्वागत है। मेरा नाम शिवी है। आप जब भी मेरे वीडियो देखते हैं, तो आपको स्क्रीन पर सुंदर-सुंदर लैंप, डिज़ाइनर टेबल, वॉल हैंगिंग्स (Wall hangings) और घर को सजाने की कमाल की चीज़ें दिखती हैं। आप सोचते होंगे कि मेरी ज़िंदगी कितनी कलरफुल (Colorful) और क्रिएटिव है। वीडियो में मैं हमेशा मुस्कुराती रहती हूँ, मेरे हाथों में पेंट ब्रश होता है या मैं किसी पुरानी चीज़ को नया रूप दे रही होती हूँ। लेकिन दोस्तों, इस 'परफेक्ट' दिखने वाले घर और इस मुस्कान के पीछे एक ऐसी औरत की कहानी है, जिसने अपनी खोई हुई पहचान को कूड़े और कबाड़ के ढेर में से ढूंढ कर निकाला है। मेरी कहानी हमारे देश की उन लाखों आम लड़कियों की कहानी जैसी ही है, जिनकी ज़िंदगी का एक ही तय रास्ता होता है। मेरी भी शादी बहुत कम उम्र में एक साधारण से मिडिल-क्लास (Middle-class) परिवार में कर दी गई थी। मेरे पति एक अच्छी लेकिन सीमित तनख्वाह वाली प्राइवेट नौकरी करते थे। शादी के बाद मेरी दुनिया सिर्फ रसोई, घर की सफाई और परिवार की ज़रूरतों तक सिमट कर रह गई थी। मेरे खुद के कोई सपने नहीं बचे थे। जब मैं आईने में खुद को देखती थी, तो मुझे 'शिवी' नहीं, बल्कि सिर्फ एक पत्नी और एक बहू नज़र आती थी। मुझे हमेशा से घर सजाने का बहुत शौक था। जब मैं मैगज़ीन्स या टीवी में बड़े-बड़े और सुंदर घर देखती, तो मेरा भी मन करता कि मेरा घर भी किसी महल जैसा दिखे। लेकिन जब मैं बाज़ार में उन सजावट के सामानों (Home decor items) की कीमत देखती, तो मेरे कदम पीछे हट जाते। मिडिल-क्लास घरों में 'सजावट' एक लग्ज़री (Luxury) मानी जाती है, जिसके लिए महीने के बजट में कोई जगह नहीं होती। यहीं से मेरे अंदर के 'जुगाड़' ने जन्म लिया। मैंने सोचा, अगर मैं महंगी चीज़ें खरीद नहीं सकती, तो क्या हुआ? मैं उन्हें खुद बना तो सकती हूँ! मैंने घर में पड़ी पुरानी प्लास्टिक की बोतलों, कार्डबोर्ड के डिब्बों, टूटी हुई चूड़ियों और पुराने अखबारों को इकट्ठा करना शुरू किया। मुझे याद है, मेरा पहला प्रोजेक्ट एक पुरानी, टूटी हुई बाल्टी थी, जिसे मैंने पेंट करके और उस पर जूट की रस्सी लपेट कर एक बेहद खूबसूरत प्लांटर (Planter) में बदल दिया था। जब मैंने उसे अपने लिविंग रूम में रखा, तो मुझे जो खुशी मिली, वो मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती। लेकिन मेरे इस शौक को परिवार और पड़ोसियों ने बहुत अजीब नज़रों से देखा। जब भी मैं किसी कबाड़ी वाले से पुरानी चीज़ें खरीदती या घर का कोई पुराना डिब्बा फेंकने से मना कर देती, तो मुझे ताने सुनने को मिलते। मोहल्ले की औरतें हंसती थीं और कहती थीं, "लो, शिवी तो कबाड़ीवाली बन गई है! दिन भर कूड़ा जमा करती रहती है।" कई बार रिश्तेदारों ने मेरे पति से कहा, "अपनी पत्नी को समझाओ, घर को कबाड़खाना बना रही है। लोग क्या कहेंगे?" वो ताने सीधे मेरे दिल पर लगते थे। कई बार मैं रात को अकेले में रोती थी। मुझे लगता था कि शायद मैं सच में पागल हूँ जो इन पुरानी चीज़ों में खूबसूरती ढूंढ रही हूँ। लेकिन जब मेरे हाथ पेंट और गोंद (Glue) से सने होते थे, तब मुझे एक अजीब सा सुकून मिलता था। वही एक समय होता था जब मैं सिर्फ 'शिवी' होती थी। एक दिन मेरी छोटी ननद घर आई। उसने मेरे बनाए हुए कुछ डिज़ाइन्स देखे और वो हैरान रह गई। उसने कहा, "भाभी, ये तो बिल्कुल किसी महंगे बुटीक के सामान जैसा लग रहा है। आप इसका वीडियो बनाकर इंटरनेट पर क्यों नहीं डालतीं?" मैंने घबराते हुए कहा, "अरे नहीं! लोग पहले ही इतना मज़ाक उड़ाते हैं, इंटरनेट पर तो पता नहीं क्या-क्या कहेंगे।" लेकिन उसने ज़बरदस्ती मेरा एक छोटा सा वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें मैं एक पुराने कार्डबोर्ड से एक सुंदर सा मिरर फ्रेम (Mirror frame) बना रही थी, और उसे अपलोड कर दिया। अगले कुछ दिनों तक मैंने अपना फोन नहीं देखा, मुझे डर था। लेकिन जब मैंने देखा, तो मैं अवाक रह गई। उस वीडियो पर लाखों व्यूज थे। लेकिन व्यूज से भी ज़्यादा, मुझे उन कमेंट्स ने रुला दिया। देश भर से आम गृहणियों (Housewives) के मैसेज आ रहे थे— "शिवी दीदी, मेरे पास भी ये खाली डिब्बा रखा है, मैं भी आज ही ये बनाऊंगी," "दीदी, आपकी वजह से मैंने अपने छोटे से कमरे को इतना सुंदर सजा लिया है, वो भी बिना पैसे खर्च किए।" उन औरतों को मुझमें अपना अक्स नज़र आ रहा था। उन्हें भी मेरी तरह बिना बजट के अपने घर को सुंदर बनाने का सपना पूरा करना था। उसी दिन मैंने तय किया कि अब मैं किसी के तानों से नहीं डरूंगी। मैंने अपने चैनल का नाम रखा और 'DIY' (Do It Yourself) और 'वेस्ट टू वेल्थ' (Waste to Wealth) के वीडियोज़ रोज़ाना बनाना शुरू कर दिया। मेरा चैनल तेज़ी से बढ़ने लगा। लेकिन एक क्रिएटर के तौर पर मेरी असली परीक्षा तो अब शुरू होने वाली थी। मुझे लगा था कि जब मेरे मिलियंस में व्यूज आएंगे, तो मेरी आर्थिक स्थिति (Financial condition) सुधर जाएगी। लेकिन पुराने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स की दुनिया बहुत क्रूर और छलावे से भरी है। सबसे बड़ी समस्या थी उनका ऐल्गोरिदम (Algorithm)। मेरा कंटेंट ऐसा था जिसमें मुझे किसी चीज़ को बनाने में 3 से 4 दिन लग जाते थे—कार्डबोर्ड काटना, उसे सूखने देना, बेस कोट लगाना, फिर पेंट करना। लेकिन प्लैटफॉर्म चाहता था कि मैं रोज़ 15 सेकंड के छोटे-छोटे वीडियो डालूं। 15 सेकंड में कोई कला कैसे सिखाई जा सकती है? अगर मैं लंबी और विस्तृत (Detailed) ट्यूटोरियल वीडियो डालती, तो प्लैटफॉर्म उसे प्रमोट ही नहीं करता था। इसके अलावा, इन प्लैटफॉर्म्स पर एक 'एस्थेटिक' (Aesthetic) दिखने का बहुत बड़ा दबाव होता है। ब्रांड्स और ऐल्गोरिदम उन क्रिएटर्स को प्रमोट करते थे जिनके पास महंगे स्टूडियो, फैंसी लाइट्स और विदेशी पेंट होते थे। मेरी वीडियोज़ ज़मीनी थीं, मेरी पृष्ठभूमि साधारण थी। मुझे जो ऐड रेवेन्यू (Ad revenue) मिलता था, वो इतना कम होता था कि उससे मेरे वीडियो में इस्तेमाल होने वाले पेंट और ग्लू का खर्च भी बमुश्किल निकल पाता था। ये टेक कंपनियाँ मेरे वीडियोज़ पर विज्ञापन चलाकर करोड़ों कमा रही थीं, लेकिन मुझ जैसी क्रिएटर को उसका 40-50% हिस्सा कमीशन के रूप में काटकर महज़ कुछ चिल्लर थमा दिए जाते थे। जब ब्रांड्स मेरे पास आते, तो वो मुझसे उम्मीद करते थे कि मैं उनके महंगे और केमिकल वाले प्रोडक्ट्स का मुफ्त में या कौड़ियों के भाव में प्रचार करूँ। मैं थक चुकी थी। मैं दिन में घर का काम करती, रात-रात भर जागकर वीडियो एडिट करती, और बदले में मुझे मिल रही थी सिर्फ निराशा। मुझे लगा कि शायद मेरे घर वालों के ताने सही थे; इस 'शौक' से घर का राशन नहीं आ सकता। और फिर, मेरी ज़िंदगी में एक ऐसा बदलाव आया जिसने मेरे सपनों को एक ठोस ज़मीन दे दी— vTogether। जब मैंने vTogether के 95/5 रेवेन्यू मॉडल (जहां 95% कमाई सीधे क्रिएटर को मिलती है) के बारे में सुना, तो मुझे पहली बार लगा कि किसी प्लैटफॉर्म ने एक क्रिएटर की असली मेहनत, उसके कटे-छिले हाथों और रातों की नींद की कीमत समझी है। मैंने बिना एक पल की देरी किए, अपनी पूरी 'DIY कम्युनिटी' को vTogether पर शिफ्ट करने का फैसला लिया। vTogether पर आते ही मुझे ऐसा लगा जैसे मुझे सांस लेने के लिए खुली हवा मिल गई हो। यहाँ मुझे 'वायरल' होने के लिए 15 सेकंड के गानों पर अजीबोगरीब वीडियोज़ नहीं बनाने पड़ते। यहाँ का सिस्टम कला और कलाकारों की इज़्ज़त करता है। मैंने यहाँ 'शिवीज़ आर्ट एंड क्राफ्ट मास्टरक्लास' (Shivi's Art & Craft Masterclass) शुरू की। मैं अपनी कम्युनिटी के साथ लाइव आती हूँ, और हम सब मिलकर 2-3 घंटे तक शांति से पेंटिंग करते हैं, पुरानी चीज़ों को नया रूप देते हैं और एक-दूसरे के सुख-दुख साझा करते हैं। चूँकि vTogether सिर्फ 5% कमीशन लेता है, मेरी कमाई इतनी बढ़ गई कि जो काम कभी सिर्फ एक 'शौक' था, वो आज एक लाखों का बिज़नेस बन चुका है। मुझे अब उन ब्रांड्स की गुलामी नहीं करनी पड़ती जो मेरी ऑडियंस को महंगे प्रोडक्ट्स बेचना चाहते हैं। मैंने अपनी कमाई से आस-पड़ोस की उन महिलाओं को नौकरी पर रखा है जो कभी मेरा मज़ाक उड़ाती थीं। आज हम सब मिलकर 'DIY किट्स' (DIY Kits) बनाते हैं और अपनी कम्युनिटी को सीधे बेचते हैं। आज जब मैं अपने सजे हुए घर के बीचो-बीच खड़ी होती हूँ, तो मेरे पति गर्व से मुझे देखते हैं। जो रिश्तेदार कल तक मुझे 'कबाड़ीवाली' कहते थे, वो आज अपने घर के इंटीरियर (Interior) के लिए मुझसे सलाह मांगने आते हैं। vTogether ने मुझे सिर्फ पैसे नहीं दिए, उसने मुझे मेरी 'पहचान' दी है। उसने एक आम हाउसवाइफ को एक सशक्त 'बिज़नेसवुमन' (Businesswoman) में बदल दिया है। मेरी उन सभी बहनों से एक ही गुज़ारिश है जो अपने घरों की चारदीवारी में अपने सपनों का गला घोंट रही हैं— आपकी पहचान सिर्फ गोल रोटियां बनाने तक सीमित नहीं है। आपके हाथों में जादू है। अगर आप कबाड़ को महल में बदल सकती हैं, तो आप अपनी किस्मत भी खुद लिख सकती हैं। बस सही प्लैटफॉर्म चुनिए, और अपनी कीमत पहचानिए। चलिए, मेरे इपॉक्सी रेज़िन (Epoxy Resin) के सूखने का समय हो गया है। आज हमें एक पुरानी मेज़ को नया रूप देना है। आपसे vTogether की अगली लाइव क्लास में मिलती हूँ! अपना और अपने सपनों का ख्याल रखिएगा।